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“राहु-केतु का रहस्यमय जाल: कैसे बनता है कालसर्प दोष

ज्योतिषाचार्य आदित्य झा

वैदिक रूप से विचार करें, तो राहु का अधिदेवता काल और प्रति अधिदेवता सर्प है, जबकि केतु का अधिदेवता चित्रगुप्त एवं प्रति अधिदेवता ब्रह्माजी हैं। इससे भी यही स्पष्ट होता है कि राहु का दाहिना भाग काल एवं बायाँ भाग सर्प है।
इसीलिए राहु से केतु की ओर कालसर्प योग बनता है ना कि केतु से राहु की ओर, और राहु एवं केतु की गति वाम मार्गी होने से यह भी स्पष्ट होता है कि जैसे सर्प सिर्फ अपने बाईं ओर ही मुड़ता है, वह दाईं ओर कभी नहीं मुड़ता।

राहु और केतु सर्प ही है और सर्प के मुँह में ही जहर होता है धड़ में नहीं। कालसर्प योग से सम्बन्धित जन्मांकों के अध्ययन करने पर यह दिखाई पड़ता है कि कुछ काल सर्प योग से युक्त जातक असहनीय कष्टों को झेल रहे हैं और कुछ उत्तरोतर समृद्धि प्राप्त कर रहे हैं। इससे यह विदित होता है कि काल रूपी सर्प राहु-केतु जिसके ऊपर प्रसन्न हैं, उसके लिये वह सब सुख सहज में उपलब्ध करा देते हैें

जो साधारण व्यक्तियों को अथक परिश्रम करने पर भी सुलभ नहीं हो पाता और यदि सर्प क्रोधित हो जाये, तो मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट दे देता है। मनुष्य के शरीर की मृत्यु तो अवश्यभावी है, उसे कोई नहीं टाल सकता; परन्तु सुख की मृत्यु, समृद्धि की मृत्यु, कीर्ति की मृत्यु आदि मृत्यु तुल्य कष्ट है
जो जीवित व्यक्ति को मृत्यु से अधिक पीड़ादायक है। व्यक्ति जब पद प्रतिष्ठा, पैसा, परिवार आदि के मद में चूर हो जाता है, तब वह अपने सम्माननीय पिता-माता, पितर तथा आश्रित अन्य लोगों को सम्मान न देकर उनसे स्वयं सम्मान कराने की इच्छायें रखता है और उन्हें मानसिक रूप से दुखी करता है। उसी का प्रभाव अगले जन्म में काल सर्प योग के रूप में आता है।

सारी सुख-सुविधाएं होते हुए भी व्यक्ति परेशान रहता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि कुंडली में किसी ना किसी तरह का दोष होता है. कुंडली में कई तरह के शापित योग होते हैं काल सर्प योग भी इन्हीं दोषों में से एक है. कुंडली में काल सर्प दोष हो तो व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

काल सर्प दोष के लक्षण
कुंडली में कालसर्प दोष हो तो जातक को कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है. कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति शारीरिक और आर्थिक रूप से हमेशा परेशान रहता है.कुछ जातकों को इस दोष की वजह से संतान संबंधी कष्ट भी उठाने पड़ते हैं. मतलब या तो वो संतानहीन रहता है या फिर संतान रोगी होती है. कालसर्प दोष होने पर जातक की नौकरी भी बार-बार छूटती रहती है और उसे कई कर्ज भी लेना पड़ जाता है. कुंडली में काल सर्प योग तो ज्योतिष की सलाह से इसका निवारण करना चाहिए.
कालसर्प दोष निवारण पूजा
ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष दूर करने के कई आसान उपाय बताए गए हैं. पति-पत्नी के बीच के बीच में हमेशा क्लेश रहता हो, तो आप मोरपंख वाला मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को अपने घर में स्थापित करे. हर दिन उनकी पूजा-अर्चना करें साथ ही ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय या ऊँ नमो वासुदेवाय कृष्णाय नम: शिवाय मंत्र का जाप करें. नियमित रूप से ऐसा करने से कालसर्प दोष की शांति होगी.
रोजगार में परेशानी दूर करने के लिए
अगर काल सर्प योग की वजह से रोजगार में परेशानी आ रही है या फिर नौकरी नहीं मिल पा रही है तो उसके लिए ये उपाय कारगर है. पलाश के फूल को गोमूत्र में डुबो कर उसे बारीक कर लें फिर इसे सुखाकर इसका चूर्ण बना लें और चंदन पाउडर के साथ मिलाकर शिवलिंग पर त्रिपुण्ड का आकार बनाएं. 21 दिनों तक ऐसा करने से आपकी नौकरी की समस्या दूर होगी.

 

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