माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। इन्हें स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई माँ बगलामुखी की साधना शत्रु बाधा, मुकदमे, भय, नकारात्मक शक्तियों और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती है।
माँ बगलामुखी साधना के प्रमुख लाभ
- शत्रुओं पर विजय प्राप्ति
- मुकदमों और विवादों में सफलता
- नकारात्मक ऊर्जा एवं अनिष्ट ग्रहों की शांति
- धन, ऐश्वर्य और आत्मबल में वृद्धि
- मनचाहे कार्यों में सफलता

साधना के मुख्य नियम
- साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- पीले वस्त्र धारण करें और पीले आसन पर बैठें।
- मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- मंत्र जाप रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे के बीच करना शुभ माना जाता है।
- गाय के घी का दीपक जलाकर हल्दी की माला से मंत्र जाप करें।
सरल साधना विधि
माँ बगलामुखी की तस्वीर या यंत्र को पीले कपड़े पर स्थापित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्वलित कर हल्दी की माला से मंत्र जाप करें। साधना में नियमितता, शुद्ध उच्चारण और पूर्ण विश्वास अत्यंत आवश्यक माना गया है।
बगलामुखी मंत्र
“ॐ हीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां कीलय, बुद्धिं विनाशय हीं ॐ स्वाहा।”
महत्वपूर्ण सावधानियां
- साधना योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करें।
- नियमों का पालन और मानसिक शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।
- बिना जानकारी के तांत्रिक प्रयोग करने से बचें।
श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव से की गई माँ बगलामुखी की आराधना साधक को आत्मविश्वास, सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।
