हिंदू धर्म में मलमास, अधिक मास या पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह मास लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है। शास्त्रों के अनुसार जिस चंद्र मास में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, उसे अधिक मास कहा जाता है। भगवान विष्णु ने स्वयं इस मास का स्वामित्व स्वीकार किया था, इसलिए इसे “पुरुषोत्तम मास” भी कहा जाता है।
इस पूरे माह में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार, नया व्यापार शुरू करना तथा अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। मान्यता है कि जब सूर्य गुरु की राशियों धनु या मीन में प्रवेश करता है, तब ग्रहों का प्रभाव सामान्य से भिन्न हो जाता है, इसलिए शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
हालांकि मलमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन यह महीना भगवान विष्णु की भक्ति, जप, तप, दान और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि इस मास में किया गया पुण्य कई गुना फल प्रदान करता है।

मलमास में क्या करना चाहिए?
- भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा
- श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण और भागवत का पाठ
- ब्रह्ममुहूर्त में स्नान
- व्रत और सात्विक भोजन
- अन्न, वस्त्र, गुड़ और घी का दान
- पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान और भजन
मलमास में क्या नहीं करना चाहिए?
- विवाह और अन्य मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश और नया व्यवसाय
- तामसिक भोजन, मदिरा और मांसाहार
- क्रोध, विवाद और गलत कार्य
शास्त्रों के अनुसार यह मास आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। जो व्यक्ति इस माह में श्रद्धा और भक्ति से भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
