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Tag: कालसर्प दोष

स्वधास्तोत्रम्: पितरों को प्रसन्न करने का अद्भुत मंत्र

स्वधास्तोत्रम्: पितरों को प्रसन्न करने का अद्भुत मंत्र

स्त्रोत एवं महत्व यह पावन स्तोत्र ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खंड) में वर्णित है, जहाँ स्वयं ब्रह्माजी द्वारा इसका उपदेश दिया गया है। “स्वधा” पितरों को अर्पित की जाने वाली वह दिव्य शक्ति है जो श्राद्ध,…

ऊर्जा का वो रहस्य, जो कोई नहीं बताता

ऊर्जा का वो रहस्य, जो कोई नहीं बताता

अध्यात्म के अनुसार, आभामंडल एक ऐसा अदृश्य ऊर्जा क्षेत्र होता है, जो हमें नकारात्मक ऊर्जा से बचाने में मदद करता है। यह केवल ऊर्जा का घेरा नहीं, बल्कि एक कवच है, जो हमारे समग्र स्वास्थ्य…

पुण्य का प्रभाव: रामचरितमानस के प्रकाश में

पुण्य का प्रभाव: रामचरितमानस के प्रकाश में

आज के युग में धार्मिकता और आस्तिकता का दिखावा हर ओर देखने को मिलता है। मंदिरों और तीर्थों में भक्तों की भीड़, दान देने वालों की कतारें — देखकर लगता है मानो संसार में पुण्यात्माओं…

“वेदों का वो रहस्य, जिसे हम भूल गए!”

“वेदों का वो रहस्य, जिसे हम भूल गए!”

धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। भारतीय सनातन परंपरा में प्रकृति, पृथ्वी, जल, वायु, वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण को भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले…

एकादशी व्रत: पहले जान लें इसके सभी नियम

एकादशी व्रत: पहले जान लें इसके सभी नियम

हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है. साल में 24 एकादशी व्रत आते हैं जिसमें अधिक मास होने पर 26 एकादशी आती है. हर महीने 2 एकादशी आती है. एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित…

दैनिक जीवन में ज्योतिष विज्ञान का प्रयोग

दैनिक जीवन में ज्योतिष विज्ञान का प्रयोग

भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का विशेष महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि-मुनियों ने ग्रह-नक्षत्रों की गति का अध्ययन करके मानव जीवन पर उनके प्रभाव को समझाया। ज्योतिष केवल भविष्य बताने का माध्यम…

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के पूजा-पाठ, कर्मकांड आदि बताए गए हैं। वेदों में भगवान की पूजा करने की विशिष्ट विधियाँ बताई गई हैं। भगवान महादेव को भगवान शिव, भोलेनाथ,…

“राहु-केतु का रहस्यमय जाल: कैसे बनता है कालसर्प दोष

“राहु-केतु का रहस्यमय जाल: कैसे बनता है कालसर्प दोष

ज्योतिषाचार्य आदित्य झा वैदिक रूप से विचार करें, तो राहु का अधिदेवता काल और प्रति अधिदेवता सर्प है, जबकि केतु का अधिदेवता चित्रगुप्त एवं प्रति अधिदेवता ब्रह्माजी हैं। इससे भी यही स्पष्ट होता है कि…