स्वधर्म की रक्षा क्यों आवश्यक है?
भारत का जीवन सदा से धर्मप्रधान रहा है। लेकिन यहाँ धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति, मत या संप्रदाय नहीं है। यह जीवन का शाश्वत नियम, समाज की रीढ़ और राष्ट्र की आत्मा है। धर्म वह…
भारत का जीवन सदा से धर्मप्रधान रहा है। लेकिन यहाँ धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति, मत या संप्रदाय नहीं है। यह जीवन का शाश्वत नियम, समाज की रीढ़ और राष्ट्र की आत्मा है। धर्म वह…
जीवन है तो समस्याएं आएंगी ही। यह किसी एक के साथ नहीं, सभी के साथ होता है। लेकिन तकलीफ तब और बढ़ जाती है जब मन में यह सवाल उठता है: “मैं तो एक भला…
युद्धभूमि में ध्यान? यह कैसा उपदेश! गीता का छठा अध्याय साधकों और मुमुक्षुओं के लिए बहुत मूल्यवान है, क्योंकि इसमें ध्यान योग की चर्चा है। इसे आत्मसंयम योग भी कहा गया है। आश्चर्य होता है…
भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जब हम पितृपक्ष में कौए को भोजन देते हैं, तर्पण करते हैं या ब्राह्मण को भोजन कराते हैं, तो मन में अक्सर सवाल उठता है: क्या सच में हमारे दादा-दादी और…
तितिक्षा क्या है, गीता और शंकराचार्य ने इसे कैसे समझाया, और आज के तनावभरे जीवन में यह गुण क्यों सबसे ज़्यादा ज़रूरी है — जानिए इस लेख में। जब सहना ही सबसे बड़ी साधना बन…
अध्यात्म के अनुसार, आभामंडल एक ऐसा अदृश्य ऊर्जा क्षेत्र होता है, जो हमें नकारात्मक ऊर्जा से बचाने में मदद करता है। यह केवल ऊर्जा का घेरा नहीं, बल्कि एक कवच है, जो हमारे समग्र स्वास्थ्य…
भारतीय धर्म-परम्परा में शाक्त संप्रदाय का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह वह मार्ग है जहाँ देवी शक्ति (महादेवी) को ही परम ब्रह्म, सृष्टि का आदि कारण और अंतिम सत्य माना जाता है। आइए जानते हैं…
प्रकृति लगातार संकेत दे रही है, और ये संकेत अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। जंगल सिकुड़ रहे हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, और प्राकृतिक संसाधन किसी न किसी वजह से…
कुरुक्षेत्र का रणक्षेत्र अब शांत हो चुका था। अठारह दिनों तक गूंजते रहे शंखनाद, अस्त्र-शस्त्रों की टंकार और चीत्कार अब मौन में बदल चुके थे। पर एक स्थान पर अभी भी कुछ अधूरा शेष था…
धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। भारतीय सनातन परंपरा में प्रकृति, पृथ्वी, जल, वायु, वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण को भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले…