अधिक पूजा करने पर भी दुख क्यों रहता है?
बहुत से लोग मन की शांति, सुख और ईश्वर की कृपा पाने के लिए नियमित पूजा-पाठ करते हैं, फिर भी उनके जीवन में दुख और अशांति बनी रहती है। इसका कारण पूजा नहीं, बल्कि पूजा…
बहुत से लोग मन की शांति, सुख और ईश्वर की कृपा पाने के लिए नियमित पूजा-पाठ करते हैं, फिर भी उनके जीवन में दुख और अशांति बनी रहती है। इसका कारण पूजा नहीं, बल्कि पूजा…
“मीरा कहै प्रभु हरि अविनाशी, तन मन ताहि पटै रे।” मीरा का यह वचन केवल भक्ति का गीत नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव का उद्घोष है। वे कहती हैं कि जब से उन्हें अविनाशी प्रभु का…
बहुत से लोग 84 लाख योनियों की दुश्वारियों से भरे जन्मों से भयभीत होकर पाप की इच्छाओं के बाबजूद बुरे कर्मो से दूर रहते है। ऐसे लोगों से कहना चाहूंगा आंतरिक इच्छाओं को केवल भयभीत…
श्रीरामचरित मानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, समाज, नेतृत्व और संगठन प्रबंधन का भी गहन स्रोत है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह महान ग्रंथ जीवन के हर पक्ष को समेटे…
कुरुक्षेत्र की वह शाम बहुत भारी थी। युद्ध के अठारह दिन समाप्त होने को थे, पर आकाश में अब भी चील-कौवों का शोर और हवा में बारूद और रक्त की गंध घुली हुई थी। रणभूमि…
विश्व के सभी धर्मों के गहन अध्ययन और आधुनिक विज्ञान के अनुसंधान से यह सत्य स्थापित होता है कि समस्त सृष्टि में एक विराट चेतना व्याप्त है। यही शक्ति सूक्ष्म रूप से प्रत्येक मानव के…
भारत में प्रकृति को कभी भी निर्जीव नहीं माना गया। यहाँ की दार्शनिक परंपरा में, भूमि और प्रकृति को स्वयं परमात्मा का एक रूप माना जाता है। इस गहरी श्रद्धा के पीछे कुछ मुख्य अवधारणाएं…
भारतीय दर्शन के चार आधारभूत स्तंभ — कर्म-सिद्धांत, पुनर्जन्म, मोक्ष और अध्यात्मवाद — ऐसे सिद्धांत हैं जिन्हें चार्वाक को छोड़कर सभी दर्शन प्रणालियाँ स्वीकार करती हैं। आस्तिक (सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदांत) हों या…
श्रीरामचरित मानस संसार के सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थों में से एक है। गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित इस ग्रन्थ में मानव जीवन के सभी प्रश्नों का उत्त्ज्ञार मिलता है। गोस्वामी जी ने अपने इस महान ग्रन्थ में समाज…
आकर्षण के नियम केवल इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं जो सिद्धांत हमें सीखाता है कि सब कुछ ऊर्जा है। इस दुनिया में हम जो कुछ देखते हैं वह सब केवल एक ऊर्जा से ही…