हरिवंश जी महाराज ने पत्रकारों द्वारा पूछे गए शिवमहापुराण, आध्यात्म एवं ज्योतिष के सवालों का हरिवंश जी महाराज ने बड़े ही सुंदर तरीके से जवाब दिया।
प्रश्न: गुरूदेव शिवमहापुराण में ऐसा क्या है, जिसे शिवभक्त काफी पंसद कर रहे हैं, और उनकी भगवान शिव के प्रति भक्ति भी बढ़ती जा रही है?
उत्तर: : भगवान शिव की महिमा का गुणगान कई प्राचीन भारतीय ग्रंथों में देखने को मिलता है लेकिन शिव पुराण में उनके जीवन पर गहराई से प्रकाश डाला गया है। शिव पुराण में उनके जीवन, विवाह, संतान, रहन-सहन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। शिव पुराण में 6 खंड और 24000 श्लोक हैं। शिव पुराण की इस संहिता में भगवान शिव से जुड़े ओंकार, शिवलिंग की पूजा और दान का महत्व बताया गया है। भगवान शिव के आंसू से बने रुद्राक्ष और उनकी भस्म के बारे में भी इस संहिता में विशेष जानकारी दी गई है।

प्रश्न: वेदों से ही विज्ञान के सिद्धांत मिले हैं कैसे?
उत्तर:: वेदों में बहुत सी ऐसी बातें लिखी गई है। जो आज विश्व भी मान रहा है। मंगल ग्रह लाल है, चंद्रमा के दक्षिण धु्रव पर 15 दिन रात्रि और 15 दिन उजाला रहता है। ये धर्मग्रंथों में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के सिद्धांत पर आधारित है। चंद्रमा के बारे में अनेक ऐसी बातें है जो वेदों में पहले ही बताई जा चुकी है। अगर इस पर रिसर्च हो तो सारे रहस्य अपने आप खुलते चले जाएंगे।
प्रश्न: क्या देवाधिदेव शिव स्वयंभू हैं?
उत्तर: एक तरह से भगवान शंकर स्वयंभू हैं क्योंकि उनकी उत्पत्ति निराकार रूपसे हुई थी। स्कंद पुराण में कहा गया है-ब्रह्मा, विष्णु, महेश ;त्रिमूर्तिद्ध की उत्पत्ति महेश्वर अंश से ही होती है। भगवान शिव स्वयंभू हैं। दरअसल शिव का ही ब्रह्मरूप, रूद्र, महेश, महाकाल, सदाशिव आदि संज्ञा दी जाने के कारण उन्हें स्वयंभू माना गया है।

प्रश्न: शिवमहापुराण को पढ़ने से क्या फायदे होते हैं?
उत्तर: ़शिव पुराण का पाठ करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति को भोग और मोक्ष दोनों की ही प्राप्ति होती है। यदि आप अपने पापों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो शिव पुराण का पाठ सबसे ज्यादा लाभकारी है। शिव पुराण का पाठ करने से इंसान को मृत्यु का भय नहीं सताता मानसिक शांति की प्राप्ति के लिये भी शिव पुराण का पाठ किया जाता है।
प्रश्न: शिव महापुराण के बताए तरीके से कैसे मानव उन्नति प्राप्त कर सकता है?
उत्तर: शिव पुराण में सत्य बोलना और सत्य का साथ देने की सीख मिलती है। शिव पुराण के अनुसार जब माता पार्वती भगवान शिव से पूछती हैं कि सबसे बड़ा धर्म क्या है तो भगवान शिव कहते हैं सत्य का साथ देना ही सबसे बड़ा धर्म है।
अर्थात व्यक्ति को कभी भी असत्य के मार्ग पर नहीं चलना चाहिये। जो भी व्यक्ति आजीवन सत्य के मार्ग पर चलता है भगवान शिव उसे उन्नति अवश्य प्रदान करते हैं।
