शास्त्रों और संत-महात्माओं ने कई मंत्रों का उल्लेख किया है, लेकिन एक मंत्र ऐसा है जिसे कलियुग में सबसे सरल और सबसे शक्तिशाली माना गया है। यह मंत्र इतना प्रभावशाली है कि इसके जाप मात्र से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे भगवान का साक्षात प्रेम अनुभव होता है।
वह महामंत्र है:
राधे कृष्ण, राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, राधे राधे।
राधे श्याम, राधे श्याम, श्याम श्याम, राधे राधे॥
यह केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव है। इस मंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें भगवान से पहले उनकी शक्ति, यानी राधा रानी का नाम आता है।
ऐसा माना जाता है कि जो भक्त राधा जी को प्रसन्न कर लेता है, उसे भगवान कृष्ण की कृपा स्वत: ही मिल जाती है। राधा रानी करुणा और प्रेम की सागर हैं। उनका नाम लेने से ही श्री कृष्ण अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं।

राधे कृष्ण मंत्र का अर्थ और महिमा
इस मंत्र का हर शब्द दिव्य ऊर्जा से भरा है।
राधे: यह शब्द आराधना से बना है। राधा रानी भक्ति और प्रेम की उच्चतम अवस्था का प्रतीक हैं। उनका नाम लेना ही सबसे बड़ी पूजा है। वह भगवान कृष्ण की आत्मा हैं।
कृष्ण: यह नाम कर्ष धातु से बना है, जिसका अर्थ है आकर्षित करने वाला। भगवान कृष्ण अपने दिव्य सौंदर्य, प्रेम और लीलाओं से पूरे ब्रह्मांड को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
जब आप राधे कृष्ण कहते हैं, तो आप वास्तव में आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का आह्वान करते हैं। आप प्रेम के उस सर्वोच्च रूप को पुकारते हैं, जो इस भौतिक दुनिया के दुखों से मुक्ति दिला सकता है। यह राधा कृष्ण का सबसे शक्तिशाली मंत्र इसलिए है क्योंकि यह सीधे प्रेम के स्रोत से जुड़ता है।
मंत्र जाप की सही विधि क्या है?
किसी भी मंत्र का पूर्ण लाभ तभी मिलता है, जब उसे सही विधि और श्रद्धा के साथ किया जाए। नीचे दी गई विधि का पालन करके आप इस महामंत्र की ऊर्जा को पूरी तरह से अनुभव कर सकते हैं।

समय का चुनाव: मंत्र जाप के लिए सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे के बीच) होता है। इस समय वातावरण शांत और सात्विक ऊर्जा से भरपूर होता है। यदि यह संभव न हो, तो आप सुबह या शाम को पूजा के समय भी जाप कर सकते हैं।
स्थान की पवित्रता: एक शांत और स्वच्छ स्थान चुनें। आप अपने घर के मंदिर या किसी भी ऐसे कोने में बैठ सकते हैं, जहाँ कोई आपको परेशान न करे।
शारीरिक शुद्धता: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शुद्धता केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन की भी आवश्यक है।
आसन: जमीन पर एक ऊनी या कुशा का आसन बिछाकर बैठें। पालथी मारकर (सुखासन में) बैठें और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
माला का प्रयोग: मंत्र जाप के लिए तुलसी की माला का प्रयोग सर्वोत्तम माना जाता है। तुलसी भगवान विष्णु और कृष्ण को अत्यंत प्रिय है। 108 मनकों की एक माला का जाप एक अनुष्ठान माना जाता है।
संकल्प लें: जाप शुरू करने से पहले, अपने हाथ में थोड़ा जल लेकर संकल्प लें। आप जिस भी इच्छा (जैसे- मानसिक शांति, प्रेम संबंध में सफलता, या आध्यात्मिक उन्नति) के लिए जाप कर रहे हैं, उसे मन में दोहराएं और जल को भूमि पर छोड़ दें।
ध्यान करें: जाप शुरू करने से पहले, कुछ क्षणों के लिए अपनी आँखें बंद करें। अपने मन में राधा-कृष्ण के सुंदर स्वरूप का ध्यान करें। कल्पना करें कि वे आपके सामने हैं और आप पर अपनी कृपा बरसा रहे हैं।
मंत्र का उच्चारण: अब माला लेकर मंत्र का जाप शुरू करें। हर मनके के साथ राधे कृष्ण, राधे कृष्ण मंत्र का स्पष्ट और प्रेमपूर्वक उच्चारण करें। बहुत तेज या बहुत धीरे न बोलें। आपका ध्यान पूरी तरह से मंत्र के शब्दों और उसके भाव में होना चाहिए।
नियमितता: सबसे महत्वपूर्ण नियम है नियमितता। प्रतिदिन कम से कम एक माला (108 बार) जाप करने का नियम बनाएं। आप इसे अपनी सुविधानुसार 3, 5, 7 या 11 माला तक बढ़ा सकते हैं। इस दिव्य मंत्र का नियमित जाप आपके जीवन के हर पहलू को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
