नवरात्र देश भर में अलग-अलग रूप में मनाए जाते हैं। पूजा अर्चन की जाती है। सबका तात्पर्य यह ही है कि देवी शक्ति की पूजा कर हम उनसे अपने और समाज के कल्याण का आशीर्वाद मांगे। स्वस्थ समाज की मांग करें। ये सब कुछ सदियों से चला आ रहा है। आज समय की मांग है कि हम आगे बढ़े। वक्त की जरूरत के साथ परिवर्तन करें।
आज देश की देवियां, महिलाएं, मातृशक्ति विकास के हर क्षेत्र में अपना योगदान कर रही हैं। कार तो बहुत समय से चलाती रही हैं। अब ये आटो, ट्रक, ट्रेन, मालगाड़ी भी चलाने लगीं हैं। ये प्लेन उड़ा रही हैं। अब तो सेना में जाकर बार्डर की हिफाजत भी महिलाएं कर रही हैं। आधुनिकतम लड़ाकू विमान भी उड़ा रहीं हैं। उन्हें नियंत्रित भी कर रही हैं।

कभी गाना, बजना, नाचना महिलाओं की कला मानी जाती थी। उसमें उन्हें पारंगत करने के साथ साथ पुराने समय से परिवार की बेटियों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, अनाज पिसाई, छनाई के साथ घर के कामकाज भोजन बनाने में आदि में निपुण किया जाता था। ताकि वह समय की जरूरत के हिसाब के शादी के बाद अपने परिवार को संभाल सकें। इस समय शिक्षा पर उतना जोर नही था। परिवार की जरूरतें बढ़ी तो पढ़ी लिखी महिलाएं घर की चाहरदीवारी से

निकलीं। नौकरी करने लगीं। बिजनेस में परिवार को सहयोग देने लगीं। समय बदला। महिलाएं आज शिक्षित हो सभी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। नौकरी के लिए अकेली युवती का विदेश जाना अब आम हो गया। पैरा मिलेट्री फोर्सेज में योगदान करने के साथ आज वह सेना में आकर देश सीमाओं को सुरक्षित बनाने और शत्रु से लोहा लेने में भी लगी हैं।
समय के साथ साथ समाज की प्राथमिकताएं भी बदलीं। नहीं बदला तो महिलाओं और युवतियों के शोषण का सिलसिला। भारतीय समाज में फैली दहेज की कुप्रथा के कारण गर्भ में ही बालिका भ्रूण मारे जाने लगे। देश में चेतना आई, शिक्षा का स्तर बढ़ा पर महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध कम नहीं हुए।
