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नई सोच के साथ पुराने संस्कार—यही है सच्ची आधुनिकता

माता-पिता के पास पैसा अधिक होने की वजह से वे अपने बच्चों को हर सुविधा उपलब्ध करवाने के चक्कर में उन्हें बबार्दी की तरफ ले जा रहे हैं। कम बच्चे होने की वजह से माता-पिता के दिमाग में असुरक्षा की भावना रहती है जिसके कारण उनके बच्चे इस परिस्थिति का लाभ उठाते है तथा अपनी इच्छापूर्ति के लिए अपने माता-पिता को ब्लैकमेल करते हैं। आज के समय में पैसा कमाने के लिए व्यक्ति हर नैतिक व अनैतिक साधन प्रयोग कर रहा है। प्रकृति का यह नियम है कि अनैतिक तरीके से कमाया हुआ धन परिवार में अशांति लाता है, पैसा अधिक होने की वजह से आज स्कूल के बच्चों से लेकर विश्वविद्यालय तक प्रत्येक लड़का-लड़की के पास कीमती मोबाइल फोन और लैपटॉप नैट सुविधा के साथ माता-पिता ने उपलब्ध करवा रखें है जो कि बच्चों को बिगाड़ने में सबसे ज्यादा कारगर साबित हो रहे हैं।

आज की पीढ़ी की बबार्दी के पीछे माता-पिता व शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। यदि माता-पिता व शिक्षक उच्चकोटि के आदर्श रखते हों तो उनके बच्चे व शिष्य कदापि अपने मार्ग से विचलित नही हो सकते, इसीलिए माता-पिता सावधान! आपके बच्चे आपकी नजरों के दायरे में इस प्रकार रहने चाहिए जिसका पता आपके बच्चों को भी न लग पाए कि उनके माता-पिता उन पर नजर रखें हैं। यदि किसी माता-पिता के बच्चे रास्ते से भटक रहे हैं तो तुरंत बच्चों के शिक्षकों से संपर्क करें। यदि स्थिति ज्यादा खराब है तो किसी समाजसेवी संस्था से परामर्श करके सुधार लाने का प्रयत्न करें, स्थिति के नियंत्रण से बाहर होने पर स्थानीय पुलिस का सहारा लेने से भी संकोच न करें।

बच्चों को सही मार्ग पर ले जाने व भौतिकवाद व कलयुगी सोच से बचाने के लिए माता-पिता को बच्चे के पैदा होने से लेकर अपने पैरों पर खड़ा होने तक लगातार संघर्षमय रहना चाहिए। याद रखें आदर्श व संस्कार पैसों से नही खरीदे जा सकते लेकिन इतना जरूर है कि अधिक पैसों के कारण आदर्श व संस्कार टूटते नजर आते हैं, इसीलिए बच्चों को जेब खर्च कम से कम दें, उनके खर्च करने के तरीकों पर नजर रखें, उनके दोस्तों की जानकारी रखें तथा स्कूल व कॉलेज में होने के दौरान उन पर पैनी नजर रखें। यदि कोई लड़का-लड़की माता-पिता के सामने कोई ऐसी मांग रखता है जो उसकी मंजिल पाने के लिए आवश्यक नही, तो उसे पूरा न करें। माता-पिता स्वयं नशावृति से दूर रहें व आसपास के क्षेत्र में भी नशाखोरी समाप्त करने के लिए कार्य करें। कभी भी घूसखोरी व अनैतिक तरीकों से कमाया हुआ धन अपने परिवार पर खर्च न करें, अपने बच्चे को अपने से बड़ों व शिक्षकों की इज्जत करना सिखाएं तथा मानसिक व शारीरिक तौर पर स्वस्थ रखने के लिए योग का सहारा लें।

बच्चों की शिक्षा के लिए शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाई जा रही है, लेकिन वे संस्थान अपने मूल प्रयोजन की पूर्ति कितने अंशों में कर पा रहे हैं, इस ओर कोई ध्यान नही देना चाहता। बच्चों से अच्छा जीवन जीने की उम्मीद तो सभी करते है, लेकिन जीवन की बारीकियां और वास्तविकताएं उन्हें समझाने के लिए न माता-पिता तैयार होते हैं न ही शिक्षक। बच्चों से संयमशीलता की आशा करने वाले बच्चों के लिए अच्छा आदर्श व वातावरण प्रस्तुत करने से हमेशा कतराते रहते हैं।
बच्चों की शक्ति का मनचाहा उपयोग कर लेने में सभी को उत्साह है, लेकिन उसका विचलित मन ठीक करने में किसी की रूचि नही है। आदेश के अनुगमन के लिए बच्चों को बहुत से उपदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन यदि वे उस रास्ते पर चलना चाहें तो उनका साथ देने के लिए कोई तैयार नही होता। ऐसे सैंकड़ों उदहारण सामने दिखाई देते हैं, जिनमें यह कटु सत्य है कि नई पीढ़ी से जितनी अधिक अपेक्षाएं की जाती हैं, व्यावहारिक स्तर पर उनके प्रति उतनी ही उपेक्षा भी बरती जाती है। उनके हित की कामना करने वाले तो बहुत हैं, लेकिन उनके हित को संवारने वालों की कमी है यह अभाव मिटाना होगा, तभी नई पीढ़ी से प्रगति के स्वप्न साकार हो सकेंगे।

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