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कार्तिक स्नान के नियम और महत्व?

हरिजागरणं प्रात:स्नानं तुलसिसेवनम। उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके।।
इन पांचों नियमों का पालन करने से कार्तिक मास का व्रत करने वाले को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। वह फल इस लोक में ऐश्वर्य एवं परलोक में सद्गति देने वाला बताया गया है। इस मास की महत्ता स्वयं बह्माजी ने नारद जी को बताई है, ह्ययह मास मनुष्यों के लिए अत्यंत दिव्य, पुण्यप्रदाता, पापनाशक तथा मुक्ति, मोक्ष और आध्यात्मिक ज्ञान देने वाला है क्योंकि इस मास में सभी देव, मनुष्यों के अत्यंत सन्निकट होते हैं, जो इसमें किए गए स्नान, दान, जप, हवन आदि को विधिवत ग्रहण करके पुण्य फल प्रदान करते हैं।

पवित्र नदियों में स्नान 
सतयुग के बाद अगर कोई माह का नाम आता है तो वो है कार्तिक मास। माना जाता है कि इस माह की पूर्णिमा वाले दिन तो भगवान भी धरती पर उतर आते हैं। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है इसलिए इस दौरान काशी, प्रयाग राज जैसे तीर्थ स्थलों पर जमकर भक्तों की भीड़ देखी जाती है। लेकिन अगर आप किसी कारणवश पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच पाते हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप अपने नहाने वाले जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिला सकते हैं।
सूर्योदय से पहले किया गया स्नान
घर में स्नान करने के बाद आप तुलसी के पौधे ओर आप अपने घर के मंदिर में घी-तेल का दीपक सुबह-शाम जला सकते हैं और कार्तिक मास की कथा सुन सकते हैं। कार्तिक माह में प्रतिदिन सूर्योदय से पहले किया गया स्नान एक हजार गंगा स्नान के बराबर माना गया है। कार्तिक मास में ही तुलसी माता और शालिग्राम का विवाह किया जाता है औऱ कहते हैं कि सुबह-शाम तुलसी के पास दीपक जलाने से मां लक्ष्मी और प्रभु विष्णु की कृपा इंसान के ऊपर बरसती है और उसके घर में धन-वैभव की प्राप्ति होती है।

भक्तों का सीधे साक्षात्कार श्रीहरि से होता है
कार्तिक माह में अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व है। ये महीना संयमित होकर प्रभु में ध्यान लगाने का होता है। इससे इंसान को हर तरह का सुख और शांति मिलती है। भक्तों का सीधे साक्षात्कार श्रीहरि से होता है इसलिए लोग इस माह का बेसब्री से इंतजार भी करते हैं।
हाथ में कुशा लेकर स्नान करें
स्नान के बारे में महर्षि अंगिरा ने कहा है कि अगर आप स्नान करने गए हैं तो हाथ में कुशा लेकर स्नान करें जिससे आपको कर्मफल की प्राप्ति हो इसी प्रकार आप अगर दान कर रहे हों तो आप अपने हाथ से पहले जल दान करें और फिर किसी और चीज का दान करें, इससे आपके सारे पापों का अंत तो होगा ही साथ ही आपकी हर इच्छा भी पूरी होगी

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