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दिवाली की रात काली पूजा उपासना की पूरी विधि

अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दिवाली पूरे भारत में उल्लास से मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और श्रीगणेश के पूजन का विधान है। पूर्वी भारत, विशेषकर बंगाल, असम और ओडिशा में इसी रात माँ काली की भी पूजा होती है। इसे काली पूजा, महानिशा पूजा या श्यामा पूजा कहते हैं।

इस वर्ष (2026) दिवाली रविवार, 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या पर है, और काली पूजा भी उसी रात 8 नवंबर को पड़ती है।

काली पूजा क्या है?

काली पूजा कार्तिक मास की अमावस्या को ही मनाई जाती है, यानी उसी दिन जब देश भर में दीपावली और लक्ष्मी पूजा होती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी काली 64,000 योगिनियों के साथ प्रकट हुई थीं।

माँ काली के प्रमुख रूप

महाकाली, श्मशान काली, गुह्य काली, भद्र काली, काम काली और दक्षिण काली।

माँ का रूप भले उग्र दिखे, पर उनके दरबार में दान और दंड दोनों मिलते हैं। श्रद्धा से पूजा करने पर वे अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।

पूजन सामग्री की सूची

श्रेणी सामग्री
पूजन अगरबत्ती, धूप, फूल (विशेषकर लाल गुड़हल), कुमकुम, हल्दी, रोली, अक्षत, लाल चुनरी या वस्त्र
पवित्र वस्तुएँ गंगाजल, कलश, शंख, नारियल, सुपारी, पूर्णपात्र, घंटी
दीप और हवन सरसों के तेल का दीपक, कपूर, देसी घी, हवन सामग्री, पतली लकड़ियाँ, कॉटन की बत्तियाँ, लाइटर
अन्य काली उड़द दाल, गुड़, चावल, लाल-पीले रंग (रंगोली के लिए)
भोग हलवा या दूध से बनी मिठाइयाँ

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. समय: माँ काली की पूजा रात में की जाती है। बंगाल में यह मध्य रात्रि के आसपास होती है।
  2. चौकी की स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ और उस पर माँ की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. गणेश पूजन: माँ के साथ गणेश जी को विराजित करें और सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें।
  4. श्रृंगार: माँ को लाल चुनरी अर्पित करें, फिर तिलक, हल्दी, रोली और कुमकुम लगाएँ।
  5. अर्पण: लाल कुमकुम, अक्षत और गुड़हल के लाल फूल चढ़ाएँ।
  6. दीप: माँ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  7. भोग और आरती: हलवे या दूध की मिठाई का भोग लगाएँ, फिर धूप-दीप और आरती करें।

मान्यता है कि पूरी श्रद्धा से उपासना करने पर भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • काली साधना की कुछ विधियाँ तांत्रिक होती हैं। ऐसी साधना केवल योग्य गुरु या अनुभवी पंडित के मार्गदर्शन में करें। सामान्य गृहस्थ ऊपर बताई सरल पूजा से माँ की आराधना कर सकते हैं।
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