स्वधर्म की रक्षा क्यों आवश्यक है?
भारत का जीवन सदा से धर्मप्रधान रहा है। लेकिन यहाँ धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति, मत या संप्रदाय नहीं है। यह जीवन का शाश्वत नियम, समाज की रीढ़ और राष्ट्र की आत्मा है। धर्म वह…
भारत का जीवन सदा से धर्मप्रधान रहा है। लेकिन यहाँ धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति, मत या संप्रदाय नहीं है। यह जीवन का शाश्वत नियम, समाज की रीढ़ और राष्ट्र की आत्मा है। धर्म वह…