श्री हरिवंश जी महाराज ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के उत्थान और मानव सेवा को समर्पित किया है। सनातन धर्म के सिद्धांतों से प्रेरित होकर उन्होंने आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया।
अन्नदान (भोजन वितरण): महाराज जी नियमित रूप से अन्नदान करते हैं, जिससे जरूरतमंदों तक पौष्टिक भोजन पहुँच सके। उनका यह संदेश कि “नर सेवा ही नारायण सेवा है”, हजारों भक्तों को प्रेरित करता है।
मंदिर पुनर्निर्माण और संरक्षण: श्री हरिवंश जी महाराज ने अनेक प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के कार्यों का नेतृत्व किया है, जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा मिली है।

दहेज प्रथा के विरुद्ध जागरूकता: महाराज जी ने प्रवचनों और शिक्षण के माध्यम से दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने अपने शिष्यों को इसके दुष्परिणाम समझाकर सरल और सादा विवाह को बढ़ावा दिया है।
श्रीमद्भगवद्गीता का शिक्षण: श्री हरिवंश जी महाराज श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य ज्ञान को सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। उनके प्रवचन न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि जीवन के कठिन दौर में मार्गदर्शन भी करते हैं।
श्री हरिवंश जी महाराज का जीवन स्वयं एक प्रेरणा है, जो यह दशार्ता है कि भक्ति, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। श्री हरिवंश जी महाराज ने गरीब एवं असहाय बच्चों के लिए एक आधुनिक गुरुकुल की स्थापना का संकल्प लिया है।

यह गुरुकुल होगा : नि:शुल्क शिक्षा और विद्या का केंद्र जहाँ संस्कार, योग, शास्त्र और विज्ञान का समन्वय होगा और बच्चों को कौशल विकास से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
गुरुकुल का उद्देश्य: : शिक्षा को सेवा का रूप देकर ज्ञान से गरीबी और अज्ञानता को मिटाना
एक ऐसे भारत की नींव रखना जहाँ हर बच्चा अपने जीवन में उजाला ला सके
अच्छे गुरुकुल की आवश्यकता क्यों है?
महाराज जी यह मानते हैं कि गुरुकुल केवल शिक्षा का स्थान नहीं होता, वह एक जीवन शैली होती है झ्र जहाँ शिक्षा, सेवा, साधना और संस्कार चारों का समन्वय होता है।
