यदि कोई भक्त बाबा भैरव को कालाष्टमी के दिन काली उड़द या उससे बनी सामग्री जैसे-इमरती, कचैड़ी, दही बड़े आदि एवं दूध व मेवे से बनी चीजों का भोग लगाता है तो बाबा उसकी हर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।चूंकि बाबा भैरव को तंत्र के देवता माना गया है इसलिए उन्हें शराब का भी प्रसाद चढ़ाया जाता है।यदि घर में कोई भी सदस्य लंबे समय से किसी बीमार से पीड़ित है तो काल भैरव मन्त्र उसके लिए सबसे ज्यादा प्रभावशाली साबित होता है।
काल भैरव मंत्र जप विधि
काल भैरव मंत्र का जप करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल पर पूर्ण विधि-विधान अनुसार काल भैरव यंत्र की स्थापना करें।याद रहे कि काल भैरव मंत्र का जप नियमित रूप से व समय के अनुसार ही करना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल पर घी का एक दीपक व धूप आदि लगाएं। दीपक के लिए केवल एक चैमुखा मिट्टी या पीतल का ही प्रयोग करें। अब सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का ध्यान करें। इसके बाद ही भैरव बाबा का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का जप करना आरम्भ करें। काल भैरव का आह्वान करने के लिए स्फटिक की माला का इस्तेमाल करना शुभ माना गया है।

मंत्र जप करने से पहले ही उसके जप की संख्या अपने सामर्थ्य अनुसार निश्चित कर लें। इसके बाद प्रतिदिन इसी तरह समान मात्रा में मन्त्र का जप करें। ध्यान रहे कि यदि आप पूजा स्थल के अतिरिक्त किसी अन्य पवित्र स्थान पर चैकी की स्थापना करके काल भैरव मंत्र का जाप कर रहे हैं तो इसके लिए केवल तेल के दीपक का प्रयोग करें। उपासक का मुंह मंत्र जपने के दौरान पूरब दिशा की ओर होना चाहिए और उसे लाल रंग के आसान पर ही बैठना चाहिए।

कब करें काल भैरव मंत्र का जप
शास्त्रों अनुसार काल भैरव की उपासना के लिए सबसे शुभ दिन रविवार होता है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति मंगलवार और शनिवार को भी काल भैरव की पूजा व उसके मंत्र का जप कर उनकी अराधना कर सकता है। माना जाता है कि विशेष रूप से अर्ध रात्रि (रात12 बजे) के समय की गई काल भैरव की उपासना विशेष फल प्रदान करने वाली होती है।
काल भैरव के स्वरूप
आज लोग बाबा भैरव को बटुक भैरव और काल भैरव रूप में सबसे ज्यादा पूजते हैं। कालिका पुराण में काल भैरव के कुल आठ स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके यह रूप असितांग भैरव, रुद्र भैरव, चंद्र भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव संहार भैरव हैं।
काल भैरव मंत्र का महत्व
