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गृहप्रवेश से पहले वास्तु शांति क्यों जरूरी है?

वास्तु शांति क्या है?

“वास्तु” का अर्थ है मनुष्य और भगवान के रहने का स्थान। वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विद्या है, जो पंचतत्वों यानी आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु के संतुलन के साथ जीवन जीने का मार्ग बताती है।

जाने-अनजाने घर के निर्माण या भूमि में कोई दोष रह सकता है। इन्हीं दोषों के निवारण के लिए वास्तु शांति कराई जाती है। इसमें मुख्य रूप से वास्तु देवता का विशेष पूजन होता है।

वास्तु शांति के लिए शुभ समय

पूजा के लिए वार, तिथि और नक्षत्र का विचार किया जाता है:

  • शुभ वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार
  • शुभ तिथि (शुक्ल पक्ष): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी
  • शुभ नक्षत्र: अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी, रेवती, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, स्वाति, अनुराधा और मघा

इसके साथ चंद्रबल, लग्न शुद्धि और भद्रा आदि का विचार भी कर लेना चाहिए। सही मुहूर्त के लिए किसी योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें।

विष्णुसहस्रनाम अनुष्ठान

मान्यता है कि विधिवत विष्णुसहस्रनाम का पाठ ग्रह, नक्षत्र और वास्तु दोषों की शांति में सहायक है। इसे विद्या, स्वास्थ्य, नौकरी-व्यवसाय और बाधाओं के निवारण के लिए भी शुभ माना गया है।

अनुष्ठान विधि:

  • एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर थोड़े चावल रखें।
  • उस पर जल से भरा तांबे का छोटा कलश रखें और उसमें कमल का फूल डालें।
  • कलश के पास एक फल रखें।
  • कलश पर मानसिक रूप से चारों वेदों की स्थापना करें।
  • संभव हो तो प्रातःकाल एक ही बैठक में विष्णुसहस्रनाम का सात बार पाठ करें, फिर एक बार फलश्रुति पढ़ें।
  • यह क्रम सात या इक्कीस दिन तक चलाएं।
  • रोज के चावल एक पात्र में इकट्ठा करें। अंत में उन्हें पकाकर गाय को खिलाएं या प्रसाद के रूप में बांट दें।
  • अंतिम दिन भगवान को हलवे का भोग लगाएं।
  • हो सके तो अनुष्ठान शुक्ल पक्ष में शुरू करें।

घर के लिए सरल वास्तु उपाय

प्रकाश और सजावट

  • खिड़की-दरवाजे ऐसे हों कि घर में सूर्य की रोशनी भरपूर आए।
  • ड्रॉइंग रूम में ताजे फूलों का गुलदस्ता रखें।
  • दीवारों पर हरियाली और प्रसन्नता देने वाले चित्र लगाएं।

पूजा स्थान के नियम

  • रसोई में मंदिर या पूजा की अलमारी न रखें।
  • टॉयलेट के बगल में देवस्थान न बनाएं।
  • पूजाघर में देवताओं के चित्र आमने-सामने न रखें।
  • पूजाघर की दीवारों का रंग सफेद, हल्का पीला या हल्का नीला रखें।
  • ईशान कोण के पूजाघर में कीमती वस्तुएं न छिपाएं।
  • यंत्र और स्थापना
  • ईशान कोण या ब्रह्मस्थल में शुभ मुहूर्त में स्फटिक श्रीयंत्र स्थापित करें।
  • दीपावली या किसी शुभ मुहूर्त में पूजास्थल में वास्तुदोष निवारक कवच स्थापित करें।
  • दक्षिणमुखी मुख्य द्वार पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना शुभ मानी जाती है।
  • प्रवेश द्वार के दोनों ओर गणपति की मूर्ति या स्टिकर लगाएं।
  • मुख्य द्वार के एक ओर केले का वृक्ष और दूसरी ओर गमले में तुलसी लगाएं।

शुद्धि और ऊर्जा

  • सुबह कंडे पर गुग्गल रखकर “ॐ नारायणाय नमः” बोलते हुए तीन बार घी की बूंदें डालें और धुआं हर कमरे में फैलाएं।
  • शाम को रोज कपूर जलाएं।
  • हल्दी मिले जल को पान के पत्ते से पूरे घर में छिड़कें।
  • मंदिर में नियमित घी का दीपक जलाएं और सुबह-शाम तीन बार शंख बजाएं।
  • घर के उत्तर-पूर्व में जल से भरा कलश रखें।

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