ईश्वर और बड़ों का आशीर्वाद
1. प्रभु का सिमरन करें: दुख की घड़ी में निरंतर प्रभु का स्मरण करने से मनोबल बढ़ता है और समस्या का समाधान सूझता है।
2. माता-पिता को प्रणाम करें: घर से निकलते समय माता-पिता के चरण छूने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे बृहस्पति और बुध ग्रह अनुकूल होते हैं और कठिन से कठिन काम बनने लगते हैं।
3. चंद्र ग्रह के लिए: रोज़ सुबह माता के चरण छूएं, सूर्यास्त के बाद दूध का सेवन न करें और सोमवार से शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल चढ़ाएं।
दान और जीव-सेवा
4. गाय और कुत्ते को रोटी: घर की पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को देने से घर में रिद्धि-सिद्धि और भाग्योदय की मान्यता है।
5. चींटियों को भोजन: खोपरे और शक्कर का बूरा मिलाकर चींटियों को खिलाने से शनि की साढ़ेसाती में राहत मिलने की मान्यता है।
6. कौओं को रोटी: जहाँ भी कौए दिखें, वहाँ रोटी के टुकड़े डालकर आगे बढ़ जाएं। कहा जाता है कि इससे कार्यों में सफलता मिलती है।
7. गरीबों को दान: अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ न कुछ दान ज़रूर करें।

पूजा-पाठ और व्रत
8. पूर्णिमा का व्रत: हर महीने की पूर्णिमा को व्रत रखें और पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं।
9. तुलसी की सेवा: तुलसी के पौधे में नियमित जल डालें और संध्या के समय दीपक जलाएं। गुरुवार को जल में थोड़ा सा दूध भी मिला दें।
10. कपूर जलाएं: सुबह और शाम पूजा करते समय कपूर जलाएं।
घर की साफ़-सफ़ाई और सजावट
11. मांगलिक चिह्न: प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक, ॐ और शुभ-लाभ जैसे चिह्न अवश्य बनाएं।
12. घर से पुरानी चीज़ें हटाएं: टूटी-फूटी और पुरानी चीज़ें बाहर निकाल दें, दीवारों पर रंग-रोगन कराएं, मुख्य दरवाज़े पर बंदनवार लगाएं और गणेश जी की तस्वीर रखें।
13. रंगोली और दहलीज़: आंगन में रंगोली बनाएं और दहलीज़ टूटी न हो। दिन में एक बार सेंधा नमक मिले पानी से पोंछा लगाएं।
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