1. घर की स्वच्छता: शुभता की पहली सीढ़ी
धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोई और धन रखने के स्थान की विशेष सफाई करें। ज्योतिषीय परंपरा में मुख्य द्वार को घर की ऊर्जा का प्रवेश मार्ग माना गया है। संध्या के समय वहां दीपक जलाएं, सुंदर रंगोली बनाएं और स्वास्तिक या ॐ जैसे शुभ चिह्न अंकित करें।
2. लक्ष्मी-गणेश पूजन
दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की परंपरा है। लक्ष्मी धन और ऐश्वर्य की देवी हैं, जबकि गणेश जी बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता हैं। मान्यता है कि धन के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता और कार्यों में सफलता के लिए दोनों का पूजन आवश्यक है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार कमल, पुष्प, फल, मिठाई, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में सबसे अधिक महत्व मन की एकाग्रता और श्रद्धा का है।

3. दीप प्रज्वलन: अंधकार पर प्रकाश की विजय
दीपक अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार दीप इन स्थानों पर जलाए जाते हैं:
मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तुलसी के पास, रसोई, जल स्थान, घर का प्रवेश मार्ग दीप जलाते समय मन में परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना करें।
4. धन रखने के स्थान को व्यवस्थित करें
दीपावली पर तिजोरी, अलमारी या धन रखने के स्थान की सफाई शुभ मानी जाती है। पुराने अनावश्यक कागज, रसीदें और बेकार सामान हटाकर स्थान को व्यवस्थित करें। वास्तु और ज्योतिष में धन के स्थान को स्वच्छ, व्यवस्थित और सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। इसे आर्थिक अनुशासन का प्रतीक भी माना जा सकता है।
5. श्रीसूक्त और लक्ष्मी मंत्र का पाठ
श्रद्धानुसार श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र या माता लक्ष्मी के मंत्रों का पाठ किया जाता है। सामान्य रूप से इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
मंत्र-जप का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ की इच्छा नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करना और सकारात्मक भाव विकसित करना भी है।
