दिनांक: शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | तिथि: भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान विष्णु के ‘अनंत’ स्वरूप की आराधना को समर्पित है और इस दिन अनंत सूत्र धारण करने की प्राचीन परंपरा निभाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
अनंत सूत्र का पौराणिक महत्व
अनंत सूत्र की कथा महाभारत काल से जुड़ी है। जब पांडव वनवास के कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर सहित सभी पांडवों को इस संकटमोचक व्रत को करने और अनंत सूत्र धारण करने की सलाह दी थी। मान्यता है कि इसी व्रत के प्रभाव से पांडवों को उनके कष्टों से मुक्ति मिली और अंततः विजय प्राप्त हुई।

14 गांठों का रहस्य क्या है?
अनंत सूत्र की सबसे विशिष्ट पहचान इसकी 14 गांठें हैं, जो केवल एक धार्मिक रिवाज़ भर नहीं बल्कि गहरे प्रतीकात्मक अर्थ को समेटे हुए हैं। शास्त्रों के अनुसार, ये 14 गांठें भगवान विष्णु से संबद्ध चौदह लोकों (भुवनों) का प्रतिनिधित्व करती हैं — जो संपूर्ण सृष्टि, यानी ब्रह्मांड की अनंतता का प्रतीक हैं। पूजा के दौरान इस सूत्र को विधिपूर्वक पवित्र करके भगवान अनंत का स्मरण किया जाता है, ताकि साधक स्वयं को उस अनंत शक्ति से जोड़ सके।
अनंत सूत्र धारण करने की विधि
पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद परंपरा के अनुसार सूत्र बांधने का नियम इस प्रकार है:

पुरुष — दाहिनी कलाई पर अनंत सूत्र धारण करते हैं
महिलाएं — बाईं कलाई पर अनंत सूत्र धारण करती हैं
सूत्र बांधते समय निम्न मंत्र का जाप किया जाता है:
“ॐ अनन्ताय नमः”
अनंत सूत्र का आध्यात्मिक अर्थ
अनंत सूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि यह श्रद्धा, विश्वास और ईश्वर की शरण में जाने का प्रतीक है। यह भगवान विष्णु के अनंत, असीम स्वरूप को दर्शाता है — जो समय, स्थान और सीमाओं से परे है। ऐसी मान्यता है कि इसे धारण करने से साधक के जीवन में भगवान अनंत की विशेष कृपा बनी रहती है और सुख-समृद्धि तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
